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प्रेस संवाददाता सम्मेलन
दिनांक ०७.०१.२०११
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प्रेस संवाददाता सम्मेलन
दिनांक ०७.०१.२०११
रुपम पाठक के द्वारा पुर्णिया विधायक राज किशोर केसरी की हत्या के सदर्भ में मिडिया में आ रहे बयानों के बीच में दिनांक ०६.०१.२०११ को स्वतंत्र महिला संगठन बिहार विमेंस नेटवर्क, आओ बहीना, काम काजी महीला एसोशियेशन, तथा परिवर्तन जन आन्दोलन की नेतृत्वकर्ता नीलू, शिवानी, कल्पना अशोक, वर्षा, मीना, बिन्दू, प्रिती, एवं अरुण कुमार ने कटिहार मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल जाकर रुपम पाठक तथा वहाँ के पुलिस के आला अधिकारियों से मिलने की कोशिश की। हॉस्पिटल पहुँचने पर वहाँ तैनात पुलिस अधिकारी ने रुपम से इस दल को मिलने देने से इनकार कर दिया और कहा कि डी. आई. जी. से बिना अनुमति रुपम से मिलने नहीं दिया जा सकता है। इस दल ने डी. आई. जी. से मोबाईल पर बात की, उन्होंने भी रुपम से मिलने देने से इनकार कर दिया। जब तक हॉस्पिटल के सामने वाले गेट पर डी. आई. जी. से मोबाइल पर बात हो ही रही थी कि डी. आई. जी. के आदेश पर पुलिस ने झटपट रुपम को गाड़ी मे बैठाकर चुपचाप पुर्णिया कोर्ट की तरफ रवाना हुई। पटना से रवाना महिला संगठनों का दल भी उसके पीछे पुर्णिया कोर्ट पहुँचा। जैसे ही इस दल को पुलिस ने देखा वैसे ही रुपम पाठक को गाड ी में बैठाकर बेतहाशा गाड ी दौराते हुये उसे पुर्णिया मंडल कारा ले जाया गया। प्रशासन एवं पुलिस की संदेहास्पद स्थिति पर महिला संगठन के प्रतिनिधियों ने विरोध प्रकट किया। इस दल ने स्थानीय लोगों एवं बुद्धिजीवियों से बातचित की। इस बातचीत के दौरान भयानक सत्य का पर्दाफाश हुआ।
घटना का वृत्तांत यह है कि पुर्णिया विधायक राज किशोर केशरी तथा उनके निजी सहायक विपिन राय के द्वारा पुर्णिया स्थित राज हंस पब्लिक स्कूल की संचालिका रुपम पाठक का लागातार यौन शोषण किया गया। इसके खिलाफ रुपम पाठक ने २००७ में ही प्राथमिकी दर्ज की थी। इस केस को उठाने के लिये उस पर पुर्णिया विधायक की पार्टी के नेताओं द्वारा दबाव बनाया गया जिसके कारण उसने यह केस उठाया। इस बातचीत में यह भी पता चला कि पुर्णिया विधायक राज किशोर केशरी तथा उनके निजी सहायक विपिन राय तथा इनकी पार्टी के शीर्ष नेताओं द्वारा रुपम पाठक की बेटी नूपुर को उसके पुर्णिया स्थित घर से जबरन उठाकर ले गये तथा उसके साथ बलात्कार किया गया। इस घटना से प्रक्षुब्ध होकर अपने आप को कानून एवं प्रशासन के सामने असहाय महसूस करते हुये मजबूर होकर रुपम पाठक ने कानून से बाहर जाकर इस घटना को अंजाम दिया। यह दल मानता है कि रुपम पाठक ने यह हत्या आत्मरक्षा में निराश, दुखित एवं आक्रोशित होकर की। यह तथ्य भी सामने आया कि इस केस से जुड़े सत्य एवं साक्ष्य को दबाने एवं खत्म करने की कोशिश की जा रही है। यह भी आशंका है कि रुपम पाठक को न्यायिक हिरासत तथा नवलेश पाठक पर पुलिस हिरासत में मानसिक एवं शारीरिक यातनायें देकर उन्हें इस स्थिति में पहुँचाया जा सकता है कि वे सच्चाई बोलने के लायक ही नहीं बचे।
महिला संगठनों की यह मांग है किः-
१. रुपम पाठक केस में स्वतंत्र संस्थानों जैसे- सी. बी. आई., अथवा सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा जाँच करायी जाये।
१. रुपम पाठक केस में स्वतंत्र संस्थानों जैसे- सी. बी. आई., अथवा सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा जाँच करायी जाये।
२. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा इस केस में सीधा हस्तक्षेप किया जाये।
३. न्यायिक हिरासत में रुपम पाठक के मानवाधिकार का हनन ना किया जाये।
४. नवलेश पाठक के खिलाफ चल रहे झूठे मुकदमे को वापस लेकर उसे अविलम्ब रिहा किया जाये।
५. रुपम पाठक एवं नवलेश पाठक के परिवार एवं संबंधियों को सुरक्षा प्रदान की जाये।
६. रुपम पाठक केस में चल रही जाँच में गैर कानूनी हस्तक्षेप करते हुये सी. बी. आई. जाँच को भी रोकने तथा एक पक्षीय बयानबाजी करने वाले बिहार राज्य के उप मुखयमंत्री सुशील कुमार मोदी अविलम्ब इस्तिफा दें अन्यथा उनपर भी कड़ी कार्यवाई की जाये।
७. रुपम पाठक का यौन उत्पीड न करने के जुर्म में विपिन राय को अविलम्ब गिरफ्तार कर उस पर मुकदमा चलाया जाये।
८. बिहार राज्य मुखयमंत्री नितीश कुमार अपनी चुप्पी तोड कर सच्चाई सामने लायें एवं उपरोक्त मांगें पुरी करें।
बिहार पी. यू. सी. एल. तथा राष्ट्रीय महिला संगठन इस केस की जाँच करेंगे।
महिला संगठन यह मांग करते है कि इन मांगों पर २४ घंटों के अंदर राज्य के मुखयमंत्री कार्यवाई करें अन्यथा कल दिनांक ०८.०१.२०११ को ३ बजे दिन में डाकबंगला चौराहे पर महिलायें सड क पर उतरेंगी।
यह रिपोर्ट इस केस पर प्राथमिक रिपोर्ट है, दूसरी रिपोर्ट जल्द जारी की जायेगी।
नीलू (बिहार विमेंस नेटवर्क) कल्पना अशोक (आओ बहीना)
शिवानी चौधरी (कामकाजी महीला एसोशियेशन) वर्षा (परिवर्तन जन आन्दोलन)
मीना, बिन्दू, प्रिती, साजिना (बिहार विमेन्स नेटवर्क) अरुण कुमार (मानवाधिकार संगठन),
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