Wednesday, March 2, 2011

बिहार की महिला संगठनों की ओर से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र

बिहार की महिला संगठनों की ओर से पत्र

दिनांकः १०.०१.२०११
सेवा में,
          अध्यक्ष,
            राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग,
            नई दिल्ली

विषयः- रुपम पाठक के साथ हुये यौन उत्पीड़न की जाँच के संदर्भ में।

महोदय,
 रुपम पाठक ने दिनांक ०४.०१.२०११ को पूर्णिया विधायक राज किशोर केसरी की हत्या की। जिसकी जानकारी हम महिला संगठनों को मीडिया से प्राप्त हूई। इस सदर्भ में दिनांक ०६.०१.२०११ को स्वतंत्र महिला संगठन बिहार विमेंस नेटवर्क, आओ बहिना, काम काजी महिला एसोशियेशन, तथा परिवर्तन जन आन्दोलन की नेतृत्वकर्ता नीलू, शिवानी, कल्पना अशोक, वर्षा, मीना, बिन्दू, प्रीती, एवं अरुण कुमार आदि कटिहार मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल रुपम पाठक से मिलने गये। पुलिस के आला अधिकारियों ने उनसे मिलने देने से मना कर दिया तथा रुपम को पेशी के लिये वे पूर्णिया कोर्ट ले गये। इस दल ने वहाँ भी रुपम से मिलने की कोशिश की लेकिन वहाँ भी मिलने नहीं दिया गया। इस दल ने स्थानीय लोगों एवं बुद्धिजीवियों से बातचीत की। इस बातचीत के दौरान कुछ तथ्य सामने आये जो निम्न हैं-

पूर्णिया में हमारे दल के द्वारा की गयी पूछताछ एवं रुपम के द्वारा किये गये एफ. आई. आर. के अनुसार घटना का वृत्तांत यह है कि २००६ में राज हंस पब्लिक स्कूल के उद्‌घाटन समारोह में मुखय अतिथि के रुप में पूर्णिया विधायक राज किशोर केसरी (भाजपा) को रुपम के पति द्वारा आमंत्रित किया गया था। २००७ में हुये इस स्कूल के वार्षिक महोत्सव में भी वे आये थे। इस महोत्सव के दौरान उपस्थित गणमान्य लोगों द्वारा उक्त विधायक से सड़क बनवाने की मांग की गई। इस सिलसिले में विधायक एवं उसके सहयोगी विपिन राय का रुपम के स्कूल एवं घर पर आना-जाना शुरु हुआ। इसी दौरान इन लोगों के द्वारा रुपम के साथ छेड -छाड  एवं यौन उत्पीड न की प्रक्रिया शुरु हुयी। इनके द्वारा रुपम को ये धमकियाँ भी दी जाती थी कि इसकी चर्चा किसी से की या पुलिस से मिली तो तुम्हारे पूरे परिवार वालों को जान से मार देंगे एवं तुम्हारे बेटे को अगवा कर लेंगे। इसके खिलाफ रुपम पाठक २००७ में ही पूर्णिया एस० पी० एवं स्थानीय थाना प्रभारी से मिली थी। लेकिन पुलिस द्वारा इस शिकायत को नजरअंदाज किया गया। रुपम पाठक ने अपने स्कूल में कार्यरत एक अध्यापिका के पत्रकार पति नवलेश पाठक को अपनी व्यथा सुुनाई। नवलेश पाठक ने अपनी पत्रिका 'क्वीस्लिंग' में इस सत्य को प्रकाशित किया। जिसके लिये उसे भी जान से मारने की धमकियाँ मिलने लगी।

उक्त विधायक राज किशोर केसरी तथा उनके निजी सहायक विपिन राय के द्वारा रुपम पाठक का २००७ से लागातार यौन शोषण किया गया। २८.०५.२०१० को रुपम ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। इस केस को उठाने के लिये उस पर दबाव बनाया गया जिसके कारण उसे अपना बयान बदलना पड़ा। इसके बावजूद उसका यौन शोषण जारी रहा। रुपम ने ३ महीने बाद कोर्ट में जाकर विरोध पत्र दाखिल किया। (रुपम के द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी, उसके बदला गया बयान एवं पुनः दाखिल किया गया विरोध पत्र की प्रतिलीपि इस आवेदन के साथ संलग्न है।) इस पर कोई सुनवाई नहीं हुयी एवं जब प्रताड ना असह्‌य हो गई तो इससे प्रक्षुब्ध होकर अपने आप को कानून एवं प्रशासन के सामने असहाय महसूस करते हुये मजबूर होकर रुपम पाठक ने कानून से बाहर जाकर विधायक राज किशोर केसरी की हत्या कर दी। गौर करने वाली बात यह है कि उसने यह हत्या किसी पारम्परिक हथियार से नहीं की बल्कि सब्जी काटने वाले चाकू से की। यानी उसका हत्या करने का कोई पूर्वनियोजित षडयंत्र नहीं था। यह दल मानता है कि रुपम पाठक ने यह हत्या आत्मरक्षा में विवश, निराश, दुखित एवं आक्रोशित होकर की। यह तथ्य भी सामने आया कि इस केस से जुड े सत्य एवं साक्ष्य को दबाने एवं खत्म करने की कोशिशें की जा रही है। नवलेश पाठक को भी पुलिस ने झूठा मुकदमा लगाकर हिरासत में ले लिया है और उसे प्रताडि त किया जा रहा है।

 रुपम पाठक की तबीयत न्यायिक हिरासत में बिगड़ती जा रही है। महिला संगठनों को यह आशंका है कि रुपम पाठक एवं नवलेश पाठक को न्यायिक हिरासत में मानसिक एवं शारीरिक यातनायें देकर इस स्थिति में पहुँचाया जा सकता है कि वे सच्चाई बोलने के लायक ही नहीं बचें। रुपम पाठक केस में चल रही जाँच में गैर कानूनी हस्तक्षेप करने वाले, सी. बी. आई. जाँच को लम्बे समय तक रोकने वाले तथा एक पक्षीय बयानबाजी करने वाले बिहार राज्य के उप मुखयमंत्री सुशील कुमार मोदी के सत्ता में रहते हुये इस मामले की निष्पक्ष जाँच होने में रुकावट डाली जा सकती है। संगठनों के द्वारा उप मुखयमंत्री सुशील कुमार मोदी से इस्तिफा की मांग की गर्इ्र है।
 अतः हम महिला संगठन आपसे यह अनुरोध करते हैं कि इस पुरे मामले की गहराई एवं गंभीरता से जाँच कर रुपम पाठक को न्याय दिलायें। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा इस केस में सीधा हस्तक्षेप किया जाये तथा पूरे मामले की जाँच की जाये।

महिला संगठनों ने सरकर से मांग है किः
१-  न्यायिक हिरासत में रुपम पाठक एवं नवलेश पाठक के मानवाधिकार का हनन ना किया जाये।
२- नवलेश पाठक के खिलाफ चल रहे झूठे मुकदमे को वापस लेकर उसे अविलम्ब रिहा किया जाये।
३- रुपम पाठक एवं नवलेश पाठक के परिवार एवं संबंधियों को सुरक्षा प्रदान की जाये।
४- रुपम पाठक केस में चल रही जाँच में गैर कानूनी हस्तक्षेप करने वाले, सी. बी. आई. जाँच को लम्बे समय तक रोकने वाले तथा एक पक्षीय बयानबाजी करने वाले बिहार राज्य के उप मुखयमंत्री सुशील कुमार मोदी के सत्ता में रहते हुये इस मामले की निष्पक्ष जाँच न होने का खतरा है। उप मुखयमंत्री सुशील कुमार मोदी से इस्तिफा की मंग की गइ्र है।
५- रुपम पाठक का यौन उत्पीड़न करने के जुर्म में विपिन राय को अविलम्ब गिरफ्‌तार कर उस पर मुकदमा चलाया जाये।
आपसे हम निवेदन करते है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा इस केस में सीधा हस्तक्षेप किया जाये तथा पुरे मामले की जाँच कर कार्रवाई की जाये।  
 
धन्यवाद,

नीलू, मीना, बिन्दू, प्रिती, उर्मिला कर्ण, साजिना (बिहार विमेंस नेटवर्क)    कल्पना अशोक (आओ बहिना)   
शिवानी चौधरी (कामकाजी महीला एसोशियेशन) वर्षा (परिवर्तन जन आन्दोलन)
अरुण कुमार (मानवाधिकार संगठन),  सुधा वर्गीस (नावो, बिहार चैप्टर) 
शर्मिला (एकता परिषद) पुष्पा (बी. जी. भी. एस.) 
अर्चना (लोक परिषद) संजु सिंह (महिला अधिकार मोर्चा)
दलित अधिकार मंच सरोज (नौकर-दाई संघ) 
निवेदिता (विमेन जर्नलिस्ट फोरम) कंचन बाला (स्त्री चेतना संगठन)

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