Wednesday, March 2, 2011

हस्ताक्षर अभियान

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रूपम यौन उत्पीड़न कांड प्रतिरोध मार्च


बिहार में महिलाओं पर बढ ते यौन शोषण और शराब नीति के खिलाफ मार्च में शामिल हों
०४.०२.२०११ को ११ बजे दिन से
जे.पी. गोलम्बर, गांधी मैदान, पटना से विधान सभा तक जनता मार्च

दोस्तों,

आपको मालूम है कि गत ४ जनवरी, २०११ को रुपम पाठक ने पुर्णिया के विधायक राज किद्गाोर केसरी की हत्या इसलिये कर दी क्योंकि पिछले तीन वर्षों से विधायक, उसके एक सहायक विपिन राय एवं अन्य के द्वारा जघन्य यौन उत्पीड न से त्रस्त थी।
महिला संगठनों के दबाव में बिहार सरकार ने इस केस को सी.बी.आई. के सुपुर्द किया लेकिन इसका संदर्भ सिर्फ विधायक की हत्या के रुप में सी.बी.आई. को प्रस्तावित किया गया है।

हम सभी मानते हैं कि यह न केवल रुपम पाठक के साथ बल्कि बिहार की पूरी जनता के साथ धोखा है। क्योंकि जनमानस की माँग है कि यह केस संपूर्ण संदर्भ में अन्वेषण किया जाये तभी न्याय हो पायेगा। पुर्व में उप मुखयमंत्री सुशील कुमार मोदी के द्‌वारा एक पक्षीय गैर कानूनी बयानबाजी एवं मुखय मंत्री के इस मसले पर चुप्पी से जनता में अविद्गवास का माहौल बना हुआ है।

इस केस के संदर्भ में यह उल्लेखनीय है कि यौन शोषण का दूसरा दोषी विपिन राय अभी तक फरार है, दूसरी तरफ इस घटना को लोगों तक पहुँचाने वाला पत्रकार नवलेद्गा पाठक शाजिद्गा के तहत जेल में यातना भुगत रहा है।

यहाँ इस बात का उल्लेख करना आवद्गयक है कि रुपम पाठक के यौन शोषण का जो भी केस चला उसमें प्रद्गाासन-पुलिस और न्यायालय से उसे उपेक्षा का द्गिाकार होना पड़ा। और यह कहना अतिरेकपूर्ण नहीं होगा कि शायद इसी वजह से यह हत्या हुई, जिसे हम एक तरह से आत्मसम्मान के रक्षार्थ हुई घटना मानते हैं, और न्याय की अपेक्षा रखते हैं।

दोस्तों, हमारे लिये यह घटना एक प्रस्थान बिन्दु है। जिससे आगे बढते हुए हम इस तरफ अपका ध्यान आकर्षित करना जरुरी समझते हैं कि जिस समाज में औरतों का सम्मान और उसकी अस्मिता सुरक्षित नहीं वह समाज कभी भी तरक्की नहीं कर सकता है।

अगर हम पिछले ५-६ वर्षों के अपराध व न्याय की तरफ गौर करें तो पाएँगे के औरतों का यौन उत्पीड न शोषण व उनके खिलाफ अन्य अपराधों में बेतहाद्गाा बढ ोत्तरी हुई है। इसके लिये हम अपनी तरफ से कोई भी आँकड ा देकर वर्तमान सरकार को लांछित करने का इरादा नहीं रखते बल्कि सरकार के खुद के आँकड े इस सच को बतलाने के लिए काफी है।

यहाँ सिर्फ एक घटना का जिक्र ही दिल को दहला देने के लिए काफी है कि इस सरकार की नाक के नीचे १८ वर्ष की नाजि या और उसकी दो बहनों सहित पूरे परिवार को गर्म तेल से बुरी तरह जला दिया गया। यह है इस सरकार में अपनी अस्मिता को बचाने की कोद्गिाद्गा का परिणाम। यह मात्र एक छोटा सा उदाहरण है। इस तरह की कई तमाम घटनायें सरकार को आईना दिखा रही हैं।

कानून-व्यवस्था, विकास और सुद्गाासन के नाम पर जो तांडव इस ''नये बनते बिहार में हो रहा है वह है इसका वर्ग एवं जाति चरित्र।'' जिसके तहत यह दृढ ता से यह कहा जा रहा है कि सदा ही औरतें दोयम दर्जे की नगरिक ही रहेंगीं।

दूसरी तरफ बिहार के विकास की एक तस्वीर है इनके द्वारा बनायी गई उत्पाद नीति और उसके तहत राजस्व वसूलने के लिए सर्व प्रमुख इनकी शराब नीति। यह नीति पिछले ५ वर्षों से बदस्तूर चल रही है। अब हमें शराब खरीदने के लिए कोई भी जहमत उठाने की जरुरत नहीं है। वह आसानी से शहर के हर नुक्कड़-चौराहे पर उपलब्ध है। गाँवों के हर पंचायत में दो दुकानें अनिवार्य हैं। सबसे खास बात इस नीति के तहत यह है कि हर लाइसेंसधारी दूकानदार का शराब बेचने का कोटा तय है और तयद्गाुदा कोटे से कम की बिकी्र होने पर लाइसेंस के रद्‌द हो जाने का खतरा भी मौजूद है। नतीजतन शराब की बिक्री और सेवन लगभग सरेआम और समाज का एक आवद्गयक व्यवहार बना दिया गया है। दूसरी तरफ महिलाओं पर पुलिस दमन की घटनाओं मे भी बेतहाद्गाा बढोतरी हो रही है। गत दिनो मुजफ्फरपुर के मड वन में हुई घटना इसका एक ताजा प्रमाण है।

जाहिर तौर पर शराब नीति से औरतों के मान-मर्दन का सीधा रिद्गता है। इस मुद्‌दे को हम जनमानस के विचारार्थ और उनके विवेक के हवाले करना चाहते हैं। क्योंकि शराब या नद्गाा एक ऐसा व्यसन है जो अपराधों को न केवल जन्म देता है बल्कि उनके बढ ते रहने में भी सहायक होता है। इन अपराधों से औरतें सबसे ज्यादा द्गिाकार बनती हैं।

आखिर में हम इस मार्च के जरिये आप सबों से आग्रह करते है कि अपने राज्य बिहार में पनप रहे इन परोक्ष जुल्मों का पुरजोर विरोध करें। इसके खिलाफ हम पहले से ही एक हस्ताक्षर अभियान चला रहे हैं। उसमें आपके हस्ताक्षर आवद्गयक हैं।

हमारी मांगें :ह्ण आरोपी विपिन राय को यौन उत्पीड़न के जुर्म में अविलम्ब गिरफ्तार कर उस पर मुकदमा चलाया जाये।
ह्ण नवलेश पाठक के खिलाफ मनगढ ंत झूठे मुकदमे को वापस लेकर उसे अविलम्ब रिहा किया जाये।
ह्ण रुपम पाठक को पी.एम.सी.एच. में लाकर उचित इलाज कराया जाये।
ह्ण रुपम के हमलावरों पर नाम के साथ एफ.आई.आर. दर्ज करें।
ह्ण रुपम पाठक एवं नवलेश पाठक के परिवार एवं संबंधियों को सुरक्षा प्रदान की जाये।
ह्ण राजहंस पब्लिक स्कूल को अविलम्ब खोला जाये।
ह्ण रुपम पाठक केस को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीद्गा की देखरेख में जाँच की जाये।
ह्ण महिलाओं के साथ बढ  रहे अपराधों एवं उनके विरुद्ध बेवजह पुलिस दमन से उनकी सुरक्षा कर उन्हें भी मान-सम्मान से जीने का हक सुनिद्गिचत करें।
ह्ण शराब नीति अविलम्ब वापस लें।
ह्ण महिलाओं के सद्गाक्तिकरण के लिये महिला एवं बाल विभाग का गठन, महिला आयोग एवं मानवाधिकार आयोग को शक्तिद्गााली बनायें।
ह्ण रुपम पाठक केस में चल रही जाँच में गैर कानूनी एवं एक पक्षीय बयानबाजी करने वाले बिहार राज्य के उप मुखयमंत्री सुशील कुमार मोदी इस्तिफा दें।
ह्ण रुपम पाठक केस के संदर्भ में मुखयमंत्री नीतीद्गा कुमार अविलम्ब चुप्पी तोड ें।
सभी साथियों से अपील है कि न्याय की इस लड ाई में आगमी दिनांक ०२.०२.२०११ को (दोपहर १२ बजे से संध्या ५ बजे तक) बिहार के सभी जिलों में एक साथ हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा एवं दिनांक ०४.०२.२०११ को (११ बजे दिन से) जे.पी. गोलम्बर, गांधी मैदान, पटना से विधान सभा तक जनता मार्च निकाला जायेगा जिसमें अपसबों की सहभागिता आवद्गयक होगी।

आयोजकबिहार विमेंस नेटवर्क, बिहार लोक अधिकार मंच. एकता परिषद,
आओ बहिना, इप्टा, लोक परिषद, बिहार दलित अधिकार मंच, समर, परिवर्तन जन आंदोलन, स्नेहधारा, महिला मंच।
संपर्क पताः आब्दीन हाउस फ्रेजर रोड, पटना १

हस्ताक्षर अभियान और मार्च में शामिल हों

बिहार में महिलाओं पर बढ़ते यौन शोषण और शराब नीति के खिलाफ
हस्ताक्षर अभियान और मार्च में शामिल हों

प्रिय दोस्तों

आपको मालूम है कि रूपम यौन उत्पीड न कांड, महिलाओं पर बढ ते यौन शोषण और शराब नीति के खिलाफ विभन्न संगठनों के द्‌वारा संयुक्त अभियान चलाया जा रहा है।

ह्ण इसके अर्न्तगत ०२.०२.२०११ को (दोपहर १२ बजे से संध्या ५ बजे तक) बिहार के सभी जिलों में एक साथ हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा।

ह्ण इसके लिये आपसे निवेदन कि  आप अपने दो साथी को एक टेबल, बैनर (मांग लिखा हुआ), कपड ा (पुराना धोती, साड ी अन्य) और कागज के साथ अपने पड ोस के चौराहा पर काउन्टर लगाने को भेजें । आने जाने वाले लोगों को पर्चा दें और हमारी मांग से सहमत लोगों से हस्ताक्षर लें।

आगमी दिनांक ०४.०२.२०११ को (११ बजे दिन से) जे. पी. गोलम्बर, गांधी मैदान, पटना से विधान सभा तक जनता मार्च निकाला जायेगा इसके लिये उन्हें शामिल होने का अपील की जाय। इस कार्यक्रम में आप अपने साथियों के साथ बड ी संखया में सहभागिता आवद्गयक निभायें ।

हमारी मांगें :ह्ण आरोपी विपिन राय को यौन उत्पीड़न के जुर्म में अविलम्ब गिरफ्तार कर उस पर मुकदमा चलाया जाये।
ह्ण नवलेश पाठक के खिलाफ मनगढ ंत झूठे मुकदमे को वापस लेकर उसे अविलम्ब रिहा किया जाये।
ह्ण रुपम पाठक को पी.एम.सी.एच. में लाकर उचित इलाज कराया जाये।
ह्ण रुपम के हमलावरों पर नाम के साथ एफ.आई.आर. दर्ज करें।
ह्ण रुपम पाठक एवं नवलेश पाठक के परिवार एवं संबंधियों को सुरक्षा प्रदान की जाये।
ह्ण राजहंस पब्लिक स्कूल को अविलम्ब खोला जाये।
ह्ण रुपम पाठक केस को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीद्गा की देखरेख में जाँच की जाये।
ह्ण महिलाओं के साथ बढ  रहे अपराधों एवं उनके विरुद्ध बेवजह पुलिस दमन से उनकी सुरक्षा कर उन्हें भी मान-सम्मान से जीने का हक सुनिद्गिचत करें।
ह्ण शराब नीति अविलम्ब वापस लें।
ह्ण महिलाओं के सद्गाक्तिकरण के लिये महिला एवं बाल विभाग का गठन, महिला आयोग एवं मानवाधिकार आयोग को शक्तिद्गााली बनायें।
ह्ण रुपम पाठक केस में चल रही जाँच में गैर कानूनी एवं एक पक्षीय बयानबाजी करने वाले बिहार राज्य के उप मुखयमंत्री सुशील कुमार मोदी इस्तिफा दें।
ह्ण रुपम पाठक केस के संदर्भ में मुखयमंत्री नीतीद्गा कुमार अविलम्ब चुप्पी तोड ें।

हम हैं:
  बिहार विमेंस नेटवर्क, बिहार लोक अधिकार मंच. एकता परिषद, लोक परिषद, आओ बहिना,
इप्टा, बिहार दलित अधिकार मंच, समर, परिवर्तन जन आंदोलन, स्नेहधारा, महिला मंच।
संपर्क पताः आब्दीन हाउस फ्रेजर रोड, पटना १

Paper Cutting (Dharna- 16.01.2011)

एक दिवसीय धरना (१५.०१.२०११)

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प्रतिशोध मार्च एवं पुतला दहन

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रुपम पाठक के साथ हुये यौन उत्पीड़न की जाँच बिहार पी० यू० सी० एल० द्वारा करने के संदर्भ में

दिनांकः १०.०१.२०११
सेवा में,
           अध्यक्ष,
            पी० यू० सी० एल०,
            पटना, बिहार

विषयः- रुपम पाठक के साथ हुये यौन उत्पीड़न की जाँच के संदर्भ में।

महोदय,
 रुपम पाठक ने दिनांक ०४.०१.२०११ को पूर्णिया विधायक राज किशोर केसरी की हत्या की। जिसकी जानकारी हम महिला संगठनों को मीडिया से प्राप्त हूई। इस सदर्भ में दिनांक ०६.०१.२०११ को स्वतंत्र महिला संगठन बिहार विमेंस नेटवर्क, आओ बहिना, काम काजी महिला एसोशियेशन, तथा परिवर्तन जन आन्दोलन की नेतृत्वकर्ता नीलू, शिवानी, कल्पना अशोक, वर्षा, मीना, बिन्दू, प्रीती, एवं अरुण कुमार आदि कटिहार मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल रुपम पाठक से मिलने गये। पुलिस के आला अधिकारियों ने उनसे मिलने देने से मना कर दिया तथा रुपम को पेशी के लिये वे पूर्णिया कोर्ट ले गये। इस दल ने वहाँ भी रुपम से मिलने की कोशिश की लेकिन वहाँ भी मिलने नहीं दिया गया। इस दल ने स्थानीय लोगों एवं बुद्धिजीवियों से बातचीत की। इस बातचीत के दौरान कुछ तथ्य सामने आये जो निम्न हैं-

पूर्णिया में हमारे दल के द्वारा की गयी पूछताछ एवं रुपम के द्वारा किये गये एफ. आई. आर. के अनुसार घटना का वृत्तांत यह है कि २००६ में राज हंस पब्लिक स्कूल के उद्‌घाटन समारोह में मुखय अतिथि के रुप में पूर्णिया विधायक राज किशोर केसरी (भाजपा) को रुपम के पति द्वारा आमंत्रित किया गया था। २००७ में हुये इस स्कूल के वार्षिक महोत्सव में भी वे आये थे। इस महोत्सव के दौरान उपस्थित गणमान्य लोगों द्वारा उक्त विधायक से सड़क बनवाने की मांग की गई। इस सिलसिले में विधायक एवं उसके सहयोगी विपिन राय का रुपम के स्कूल एवं घर पर आना-जाना शुरु हुआ। इसी दौरान इन लोगों के द्वारा रुपम के साथ छेड -छाड  एवं यौन उत्पीड न की प्रक्रिया शुरु हुयी। इनके द्वारा रुपम को ये धमकियाँ भी दी जाती थी कि इसकी चर्चा किसी से की या पुलिस से मिली तो तुम्हारे पूरे परिवार वालों को जान से मार देंगे एवं तुम्हारे बेटे को अगवा कर लेंगे। इसके खिलाफ रुपम पाठक २००७ में ही पूर्णिया एस० पी० एवं स्थानीय थाना प्रभारी से मिली थी। लेकिन पुलिस द्वारा इस शिकायत को नजरअंदाज किया गया। रुपम पाठक ने अपने स्कूल में कार्यरत एक अध्यापिका के पत्रकार पति नवलेश पाठक को अपनी व्यथा सुुनाई। नवलेश पाठक ने अपनी पत्रिका 'क्वीस्लिंग' में इस सत्य को प्रकाशित किया। जिसके लिये उसे भी जान से मारने की धमकियाँ मिलने लगी।

उक्त विधायक राज किशोर केसरी तथा उनके निजी सहायक विपिन राय के द्वारा रुपम पाठक का २००७ से लागातार यौन शोषण किया गया। २८.०५.२०१० को रुपम ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। इस केस को उठाने के लिये उस पर दबाव बनाया गया जिसके कारण उसे अपना बयान बदलना पड़ा। इसके बावजूद उसका यौन शोषण जारी रहा। रुपम ने ३ महीने बाद कोर्ट में जाकर विरोध पत्र दाखिल किया। (रुपम के द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी, उसके बदला गया बयान एवं पुनः दाखिल किया गया विरोध पत्र की प्रतिलीपि इस आवेदन के साथ संलग्न है।) इस पर कोई सुनवाई नहीं हुयी एवं जब प्रताड ना असह्‌य हो गई तो इससे प्रक्षुब्ध होकर अपने आप को कानून एवं प्रशासन के सामने असहाय महसूस करते हुये मजबूर होकर रुपम पाठक ने कानून से बाहर जाकर विधायक राज किशोर केसरी की हत्या कर दी। गौर करने वाली बात यह है कि उसने यह हत्या किसी पारम्परिक हथियार से नहीं की बल्कि सब्जी काटने वाले चाकू से की। यानी उसका हत्या करने का कोई पूर्वनियोजित षडयंत्र नहीं था। यह दल मानता है कि रुपम पाठक ने यह हत्या आत्मरक्षा में विवश, निराश, दुखित एवं आक्रोशित होकर की। यह तथ्य भी सामने आया कि इस केस से जुड े सत्य एवं साक्ष्य को दबाने एवं खत्म करने की कोशिशें की जा रही है। नवलेश पाठक को भी पुलिस ने झूठा मुकदमा लगाकर हिरासत में ले लिया है और उसे प्रताडि त किया जा रहा है।

 रुपम पाठक की तबीयत न्यायिक हिरासत में बिगड़ती जा रही है। महिला संगठनों को यह आशंका है कि रुपम पाठक एवं नवलेश पाठक को न्यायिक हिरासत में मानसिक एवं शारीरिक यातनायें देकर इस स्थिति में पहुँचाया जा सकता है कि वे सच्चाई बोलने के लायक ही नहीं बचें। रुपम पाठक केस में चल रही जाँच में गैर कानूनी हस्तक्षेप करने वाले, सी. बी. आई. जाँच को लम्बे समय तक रोकने वाले तथा एक पक्षीय बयानबाजी करने वाले बिहार राज्य के उप मुखयमंत्री सुशील कुमार मोदी के सत्ता में रहते हुये इस मामले की निष्पक्ष जाँच होने में रुकावट डाली जा सकती है। संगठनों के द्वारा उप मुखयमंत्री सुशील कुमार मोदी से इस्तिफा की मांग की गर्इ्र है।

अतः हम महिला संगठन आपसे यह अनुरोध करते हैं कि इस पुरे मामले की गहराई एवं गंभीरता से जाँच कर रुपम पाठक को न्याय दिलायें। पी० यू० सी० एल० द्वारा इस केस में सीधा हस्तक्षेप किया जाये तथा पूरे मामले की जाँच की जाये।

 
धन्यवाद,

नीलू, मीना, बिन्दू, प्रिती, उर्मिला कर्ण, साजिना (बिहार विमेंस नेटवर्क)    कल्पना अशोक (आओ बहिना)   
शिवानी चौधरी (कामकाजी महीला एसोशियेशन) वर्षा (परिवर्तन जन आन्दोलन)
अरुण कुमार (मानवाधिकार संगठन),  सुधा वर्गीस (नावो, बिहार चैप्टर) 
शर्मिला (एकता परिषद) पुष्पा (बी. जी. भी. एस.) 
अर्चना (लोक परिषद) संजु सिंह (महिला अधिकार मोर्चा)
दलित अधिकार मंच सरोज (नौकर-दाई संघ) 
निवेदिता (विमेन जर्नलिस्ट फोरम) कंचन बाला (स्त्री चेतना संगठन)

रुपम पाठक के साथ हुये यौन उत्पीड़न की जाँच के संदर्भ में राष्ट्रीय महिला आयोग को पत्र

दिनांकः १०.०१.२०११
सेवा में,
          अध्यक्ष,
          राष्ट्रीय महिला आयोग,
          नई दिल्ली

विषयः- रुपम पाठक के साथ हुये यौन उत्पीड़न की जाँच के संदर्भ में।

महोदय,
 रुपम पाठक ने दिनांक ०४.०१.२०११ को पूर्णिया विधायक राज किशोर केसरी की हत्या की। जिसकी जानकारी हम महिला संगठनों को मीडिया से प्राप्त हूई। इस सदर्भ में दिनांक ०६.०१.२०११ को स्वतंत्र महिला संगठन बिहार विमेंस नेटवर्क, आओ बहिना, काम काजी महिला एसोशियेशन, तथा परिवर्तन जन आन्दोलन की नेतृत्वकर्ता नीलू, शिवानी, कल्पना अशोक, वर्षा, मीना, बिन्दू, प्रीती, एवं अरुण कुमार आदि कटिहार मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल रुपम पाठक से मिलने गये। पुलिस के आला अधिकारियों ने उनसे मिलने देने से मना कर दिया तथा रुपम को पेशी के लिये वे पूर्णिया कोर्ट ले गये। इस दल ने वहाँ भी रुपम से मिलने की कोशिश की लेकिन वहाँ भी मिलने नहीं दिया गया। इस दल ने स्थानीय लोगों एवं बुद्धिजीवियों से बातचीत की। इस बातचीत के दौरान कुछ तथ्य सामने आये जो निम्न हैं-

पूर्णिया में हमारे दल के द्वारा की गयी पूछताछ एवं रुपम के द्वारा किये गये एफ. आई. आर. के अनुसार घटना का वृत्तांत यह है कि २००६ में राज हंस पब्लिक स्कूल के उद्‌घाटन समारोह में मुखय अतिथि के रुप में पूर्णिया विधायक राज किशोर केसरी (भाजपा) को रुपम के पति द्वारा आमंत्रित किया गया था। २००७ में हुये इस स्कूल के वार्षिक महोत्सव में भी वे आये थे। इस महोत्सव के दौरान उपस्थित गणमान्य लोगों द्वारा उक्त विधायक से सड़क बनवाने की मांग की गई। इस सिलसिले में विधायक एवं उसके सहयोगी विपिन राय का रुपम के स्कूल एवं घर पर आना-जाना शुरु हुआ। इसी दौरान इन लोगों के द्वारा रुपम के साथ छेड -छाड  एवं यौन उत्पीड न की प्रक्रिया शुरु हुयी। इनके द्वारा रुपम को ये धमकियाँ भी दी जाती थी कि इसकी चर्चा किसी से की या पुलिस से मिली तो तुम्हारे पूरे परिवार वालों को जान से मार देंगे एवं तुम्हारे बेटे को अगवा कर लेंगे। इसके खिलाफ रुपम पाठक २००७ में ही पूर्णिया एस० पी० एवं स्थानीय थाना प्रभारी से मिली थी। लेकिन पुलिस द्वारा इस शिकायत को नजरअंदाज किया गया। रुपम पाठक ने अपने स्कूल में कार्यरत एक अध्यापिका के पत्रकार पति नवलेश पाठक को अपनी व्यथा सुुनाई। नवलेश पाठक ने अपनी पत्रिका 'क्वीस्लिंग' में इस सत्य को प्रकाशित किया। जिसके लिये उसे भी जान से मारने की धमकियाँ मिलने लगी।

उक्त विधायक राज किशोर केसरी तथा उनके निजी सहायक विपिन राय के द्वारा रुपम पाठक का २००७ से लागातार यौन शोषण किया गया। २८.०५.२०१० को रुपम ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। इस केस को उठाने के लिये उस पर दबाव बनाया गया जिसके कारण उसे अपना बयान बदलना पड़ा। इसके बावजूद उसका यौन शोषण जारी रहा। रुपम ने ३ महीने बाद कोर्ट में जाकर विरोध पत्र दाखिल किया। (रुपम के द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी, उसके बदला गया बयान एवं पुनः दाखिल किया गया विरोध पत्र की प्रतिलीपि इस आवेदन के साथ संलग्न है।) इस पर कोई सुनवाई नहीं हुयी एवं जब प्रताड ना असह्‌य हो गई तो इससे प्रक्षुब्ध होकर अपने आप को कानून एवं प्रशासन के सामने असहाय महसूस करते हुये मजबूर होकर रुपम पाठक ने कानून से बाहर जाकर विधायक राज किशोर केसरी की हत्या कर दी। गौर करने वाली बात यह है कि उसने यह हत्या किसी पारम्परिक हथियार से नहीं की बल्कि सब्जी काटने वाले चाकू से की। यानी उसका हत्या करने का कोई पूर्वनियोजित षडयंत्र नहीं था। यह दल मानता है कि रुपम पाठक ने यह हत्या आत्मरक्षा में विवश, निराश, दुखित एवं आक्रोशित होकर की। यह तथ्य भी सामने आया कि इस केस से जुड े सत्य एवं साक्ष्य को दबाने एवं खत्म करने की कोशिशें की जा रही है। नवलेश पाठक को भी पुलिस ने झूठा मुकदमा लगाकर हिरासत में ले लिया है और उसे प्रताडि त किया जा रहा है।

 रुपम पाठक की तबीयत न्यायिक हिरासत में बिगड़ती जा रही है। महिला संगठनों को यह आशंका है कि रुपम पाठक एवं नवलेश पाठक को न्यायिक हिरासत में मानसिक एवं शारीरिक यातनायें देकर इस स्थिति में पहुँचाया जा सकता है कि वे सच्चाई बोलने के लायक ही नहीं बचें। रुपम पाठक केस में चल रही जाँच में गैर कानूनी हस्तक्षेप करने वाले, सी. बी. आई. जाँच को लम्बे समय तक रोकने वाले तथा एक पक्षीय बयानबाजी करने वाले बिहार राज्य के उप मुखयमंत्री सुशील कुमार मोदी के सत्ता में रहते हुये इस मामले की निष्पक्ष जाँच होने में रुकावट डाली जा सकती है। संगठनों के द्वारा उप मुखयमंत्री सुशील कुमार मोदी से इस्तिफा की मांग की गर्इ्र है।
 अतः हम महिला संगठन आपसे यह अनुरोध करते हैं कि इस पुरे मामले की गहराई एवं गंभीरता से जाँच कर रुपम पाठक को न्याय दिलायें। राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा इस केस में सीधा हस्तक्षेप किया जाये तथा पूरे मामले की जाँच की जाये।

महिला संगठनों ने सरकर से मांग है किः
१-  न्यायिक हिरासत में रुपम पाठक एवं नवलेश पाठक के मानवाधिकार का हनन ना किया जाये।
२- नवलेश पाठक के खिलाफ चल रहे झूठे मुकदमे को वापस लेकर उसे अविलम्ब रिहा किया जाये।
३- रुपम पाठक एवं नवलेश पाठक के परिवार एवं संबंधियों को सुरक्षा प्रदान की जाये।
४- रुपम पाठक केस में चल रही जाँच में गैर कानूनी हस्तक्षेप करने वाले, सी. बी. आई. जाँच को लम्बे समय तक रोकने वाले तथा एक पक्षीय बयानबाजी करने वाले बिहार राज्य के उप मुखयमंत्री सुशील कुमार मोदी के सत्ता में रहते हुये इस मामले की निष्पक्ष जाँच न होने का खतरा है। उप मुखयमंत्री सुशील कुमार मोदी से इस्तिफा की मंग की गइ्र है।
५- रुपम पाठक का यौन उत्पीड़न करने के जुर्म में विपिन राय को अविलम्ब गिरफ्‌तार कर उस पर मुकदमा चलाया जाये।

आपसे हम निवेदन करते है कि राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा इस केस में सीधा हस्तक्षेप किया जाये तथा पुरे मामले की जाँच कर कार्रवाई की जाये।  
 
धन्यवाद,

नीलू, मीना, बिन्दू, प्रिती, उर्मिला कर्ण, साजिना (बिहार विमेंस नेटवर्क)    कल्पना अशोक (आओ बहिना)   
शिवानी चौधरी (कामकाजी महीला एसोशियेशन) वर्षा (परिवर्तन जन आन्दोलन)
अरुण कुमार (मानवाधिकार संगठन),  सुधा वर्गीस (नावो, बिहार चैप्टर) 
शर्मिला (एकता परिषद) पुष्पा (बी. जी. भी. एस.) 
अर्चना (लोक परिषद) संजु सिंह (महिला अधिकार मोर्चा)
दलित अधिकार मंच सरोज (नौकर-दाई संघ) 
निवेदिता (विमेन जर्नलिस्ट फोरम) कंचन बाला (स्त्री चेतना संगठन)

बिहार की महिला संगठनों की ओर से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र

बिहार की महिला संगठनों की ओर से पत्र

दिनांकः १०.०१.२०११
सेवा में,
          अध्यक्ष,
            राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग,
            नई दिल्ली

विषयः- रुपम पाठक के साथ हुये यौन उत्पीड़न की जाँच के संदर्भ में।

महोदय,
 रुपम पाठक ने दिनांक ०४.०१.२०११ को पूर्णिया विधायक राज किशोर केसरी की हत्या की। जिसकी जानकारी हम महिला संगठनों को मीडिया से प्राप्त हूई। इस सदर्भ में दिनांक ०६.०१.२०११ को स्वतंत्र महिला संगठन बिहार विमेंस नेटवर्क, आओ बहिना, काम काजी महिला एसोशियेशन, तथा परिवर्तन जन आन्दोलन की नेतृत्वकर्ता नीलू, शिवानी, कल्पना अशोक, वर्षा, मीना, बिन्दू, प्रीती, एवं अरुण कुमार आदि कटिहार मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल रुपम पाठक से मिलने गये। पुलिस के आला अधिकारियों ने उनसे मिलने देने से मना कर दिया तथा रुपम को पेशी के लिये वे पूर्णिया कोर्ट ले गये। इस दल ने वहाँ भी रुपम से मिलने की कोशिश की लेकिन वहाँ भी मिलने नहीं दिया गया। इस दल ने स्थानीय लोगों एवं बुद्धिजीवियों से बातचीत की। इस बातचीत के दौरान कुछ तथ्य सामने आये जो निम्न हैं-

पूर्णिया में हमारे दल के द्वारा की गयी पूछताछ एवं रुपम के द्वारा किये गये एफ. आई. आर. के अनुसार घटना का वृत्तांत यह है कि २००६ में राज हंस पब्लिक स्कूल के उद्‌घाटन समारोह में मुखय अतिथि के रुप में पूर्णिया विधायक राज किशोर केसरी (भाजपा) को रुपम के पति द्वारा आमंत्रित किया गया था। २००७ में हुये इस स्कूल के वार्षिक महोत्सव में भी वे आये थे। इस महोत्सव के दौरान उपस्थित गणमान्य लोगों द्वारा उक्त विधायक से सड़क बनवाने की मांग की गई। इस सिलसिले में विधायक एवं उसके सहयोगी विपिन राय का रुपम के स्कूल एवं घर पर आना-जाना शुरु हुआ। इसी दौरान इन लोगों के द्वारा रुपम के साथ छेड -छाड  एवं यौन उत्पीड न की प्रक्रिया शुरु हुयी। इनके द्वारा रुपम को ये धमकियाँ भी दी जाती थी कि इसकी चर्चा किसी से की या पुलिस से मिली तो तुम्हारे पूरे परिवार वालों को जान से मार देंगे एवं तुम्हारे बेटे को अगवा कर लेंगे। इसके खिलाफ रुपम पाठक २००७ में ही पूर्णिया एस० पी० एवं स्थानीय थाना प्रभारी से मिली थी। लेकिन पुलिस द्वारा इस शिकायत को नजरअंदाज किया गया। रुपम पाठक ने अपने स्कूल में कार्यरत एक अध्यापिका के पत्रकार पति नवलेश पाठक को अपनी व्यथा सुुनाई। नवलेश पाठक ने अपनी पत्रिका 'क्वीस्लिंग' में इस सत्य को प्रकाशित किया। जिसके लिये उसे भी जान से मारने की धमकियाँ मिलने लगी।

उक्त विधायक राज किशोर केसरी तथा उनके निजी सहायक विपिन राय के द्वारा रुपम पाठक का २००७ से लागातार यौन शोषण किया गया। २८.०५.२०१० को रुपम ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। इस केस को उठाने के लिये उस पर दबाव बनाया गया जिसके कारण उसे अपना बयान बदलना पड़ा। इसके बावजूद उसका यौन शोषण जारी रहा। रुपम ने ३ महीने बाद कोर्ट में जाकर विरोध पत्र दाखिल किया। (रुपम के द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी, उसके बदला गया बयान एवं पुनः दाखिल किया गया विरोध पत्र की प्रतिलीपि इस आवेदन के साथ संलग्न है।) इस पर कोई सुनवाई नहीं हुयी एवं जब प्रताड ना असह्‌य हो गई तो इससे प्रक्षुब्ध होकर अपने आप को कानून एवं प्रशासन के सामने असहाय महसूस करते हुये मजबूर होकर रुपम पाठक ने कानून से बाहर जाकर विधायक राज किशोर केसरी की हत्या कर दी। गौर करने वाली बात यह है कि उसने यह हत्या किसी पारम्परिक हथियार से नहीं की बल्कि सब्जी काटने वाले चाकू से की। यानी उसका हत्या करने का कोई पूर्वनियोजित षडयंत्र नहीं था। यह दल मानता है कि रुपम पाठक ने यह हत्या आत्मरक्षा में विवश, निराश, दुखित एवं आक्रोशित होकर की। यह तथ्य भी सामने आया कि इस केस से जुड े सत्य एवं साक्ष्य को दबाने एवं खत्म करने की कोशिशें की जा रही है। नवलेश पाठक को भी पुलिस ने झूठा मुकदमा लगाकर हिरासत में ले लिया है और उसे प्रताडि त किया जा रहा है।

 रुपम पाठक की तबीयत न्यायिक हिरासत में बिगड़ती जा रही है। महिला संगठनों को यह आशंका है कि रुपम पाठक एवं नवलेश पाठक को न्यायिक हिरासत में मानसिक एवं शारीरिक यातनायें देकर इस स्थिति में पहुँचाया जा सकता है कि वे सच्चाई बोलने के लायक ही नहीं बचें। रुपम पाठक केस में चल रही जाँच में गैर कानूनी हस्तक्षेप करने वाले, सी. बी. आई. जाँच को लम्बे समय तक रोकने वाले तथा एक पक्षीय बयानबाजी करने वाले बिहार राज्य के उप मुखयमंत्री सुशील कुमार मोदी के सत्ता में रहते हुये इस मामले की निष्पक्ष जाँच होने में रुकावट डाली जा सकती है। संगठनों के द्वारा उप मुखयमंत्री सुशील कुमार मोदी से इस्तिफा की मांग की गर्इ्र है।
 अतः हम महिला संगठन आपसे यह अनुरोध करते हैं कि इस पुरे मामले की गहराई एवं गंभीरता से जाँच कर रुपम पाठक को न्याय दिलायें। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा इस केस में सीधा हस्तक्षेप किया जाये तथा पूरे मामले की जाँच की जाये।

महिला संगठनों ने सरकर से मांग है किः
१-  न्यायिक हिरासत में रुपम पाठक एवं नवलेश पाठक के मानवाधिकार का हनन ना किया जाये।
२- नवलेश पाठक के खिलाफ चल रहे झूठे मुकदमे को वापस लेकर उसे अविलम्ब रिहा किया जाये।
३- रुपम पाठक एवं नवलेश पाठक के परिवार एवं संबंधियों को सुरक्षा प्रदान की जाये।
४- रुपम पाठक केस में चल रही जाँच में गैर कानूनी हस्तक्षेप करने वाले, सी. बी. आई. जाँच को लम्बे समय तक रोकने वाले तथा एक पक्षीय बयानबाजी करने वाले बिहार राज्य के उप मुखयमंत्री सुशील कुमार मोदी के सत्ता में रहते हुये इस मामले की निष्पक्ष जाँच न होने का खतरा है। उप मुखयमंत्री सुशील कुमार मोदी से इस्तिफा की मंग की गइ्र है।
५- रुपम पाठक का यौन उत्पीड़न करने के जुर्म में विपिन राय को अविलम्ब गिरफ्‌तार कर उस पर मुकदमा चलाया जाये।
आपसे हम निवेदन करते है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा इस केस में सीधा हस्तक्षेप किया जाये तथा पुरे मामले की जाँच कर कार्रवाई की जाये।  
 
धन्यवाद,

नीलू, मीना, बिन्दू, प्रिती, उर्मिला कर्ण, साजिना (बिहार विमेंस नेटवर्क)    कल्पना अशोक (आओ बहिना)   
शिवानी चौधरी (कामकाजी महीला एसोशियेशन) वर्षा (परिवर्तन जन आन्दोलन)
अरुण कुमार (मानवाधिकार संगठन),  सुधा वर्गीस (नावो, बिहार चैप्टर) 
शर्मिला (एकता परिषद) पुष्पा (बी. जी. भी. एस.) 
अर्चना (लोक परिषद) संजु सिंह (महिला अधिकार मोर्चा)
दलित अधिकार मंच सरोज (नौकर-दाई संघ) 
निवेदिता (विमेन जर्नलिस्ट फोरम) कंचन बाला (स्त्री चेतना संगठन)

महिला संगठनों के साथ बैठक (१०.०१.२०११)

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News Cutting

Dakbangalow Jaam

Paper Cutting (07.01.2011)

दिनांकः ०७.०१.२०११
सेवा में,
 माननीय मुखय मंत्री,
 नीतिश कुमार,
 बिहार सरकार

विषयः- राज किशोर केशरी हत्या कांड के संदर्भ में महिला संगठनों की मांगें।

माननीय नीतिश कुमार,
 रुपम पाठक के द्वारा पुर्णिया विधायक राज किशोर केसरी की हत्या के सदर्भ  में मिडिया में आ रहे बयानों के बीच में दिनांक ०६.०१.२०११ को स्वतंत्र महिला संगठन बिहार विमेंस नेटवर्क, आओ बहीना, काम काजी महीला एसोशियेशन, तथा परिवर्तन जन आन्दोलन की नेतृत्वकर्ता नीलू, शिवानी, कल्पना अशोक, वर्षा, मीना, बिन्दू, प्रिती, एवं अरुण कुमार ने कटिहार मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल जाकर रुपम पाठक तथा वहाँ के पुलिस के आला अधिकारियों से मिलने की कोशिश की। हॉस्पिटल पहुँचने पर वहाँ तैनात पुलिस अधिकारी ने रुपम से इस दल को मिलने देने से इनकार कर दिया और कहा कि डी. आई. जी. से बिना अनुमति रुपम से मिलने नहीं दिया जा सकता है। इस दल ने डी. आई. जी. से मोबाईल पर बात की, उन्होंने भी रुपम से मिलने देने से इनकार कर दिया। जब तक हॉस्पिटल के सामने वाले गेट पर डी. आई. जी. से मोबाइल पर बात हो ही रही थी कि डी. आई. जी. के आदेश पर पुलिस ने झटपट रुपम को गाड़ी मे बैठाकर चुपचाप पुर्णिया कोर्ट की तरफ रवाना हुई। पटना से रवाना महिला संगठनों का दल भी उसके पीछे पुर्णिया कोर्ट पहुँचा। जैसे ही इस दल को पुलिस ने देखा वैसे ही रुपम पाठक को गाड ी में बैठाकर बेतहाशा गाड ी दौराते हुये उसे पुर्णिया मंडल कारा ले जाया गया। प्रशासन एवं पुलिस की संदेहास्पद स्थिति पर महिला संगठन के प्रतिनिधियों ने विरोध प्रकट किया। इस दल ने स्थानीय लोगों एवं बुद्धिजीवियों से बातचित की। इस बातचीत के दौरान भयानक सत्य का पर्दाफाश हुआ।

घटना का वृत्तांत यह है कि पुर्णिया विधायक राज किशोर केशरी तथा उनके निजी सहायक विपिन राय के द्वारा पुर्णिया स्थित राज हंस पब्लिक स्कूल की संचालिका रुपम पाठक का लागातार यौन शोषण किया गया। इसके खिलाफ रुपम पाठक ने २००७ में ही प्राथमिकी दर्ज की थी। इस केस को उठाने के लिये उस पर पुर्णिया विधायक की पार्टी के नेताओं द्वारा दबाव बनाया गया जिसके कारण उसने यह केस  उठाया। इस बातचीत में यह भी पता चला कि पुर्णिया विधायक राज किशोर केशरी तथा उनके निजी सहायक विपिन राय तथा इनकी पार्टी के शीर्ष नेताओं द्वारा रुपम पाठक की बेटी नूपुर को उसके पुर्णिया स्थित घर से जबरन उठाकर ले गये तथा उसके साथ बलात्कार किया गया। इस घटना से प्रक्षुब्ध होकर अपने आप को कानून एवं प्रशासन के सामने असहाय महसूस करते हुये मजबूर होकर रुपम पाठक ने कानून से बाहर जाकर इस घटना को अंजाम दिया। यह दल मानता है कि रुपम पाठक ने यह हत्या आत्मरक्षा में निराश, दुखित एवं आक्रोशित होकर की। यह तथ्य भी सामने आया कि इस केस से जुड़े सत्य एवं साक्ष्य को दबाने एवं खत्म करने की कोशिश की जा रही है। यह भी आशंका है कि रुपम पाठक को न्यायिक हिरासत तथा नवलेश पाठक पर  पुलिस हिरासत में मानसिक एवं शारीरिक यातनायें देकर उन्हें इस स्थिति में पहुँचाया जा सकता है कि वे सच्चाई बोलने के लायक ही नहीं बचे।

महिला संगठनों की यह मांग है किः-१. रुपम पाठक केस में स्वतंत्र संस्थानों जैसे- सी. बी. आई., अथवा सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा जाँच करायी जाये।
२. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा इस केस में सीधा हस्तक्षेप किया जाये। 
३. न्यायिक हिरासत में रुपम पाठक के मानवाधिकार का हनन ना किया जाये।
४. नवलेश पाठक के खिलाफ चल रहे झूठे मुकदमे को वापस लेकर उसे अविलम्ब रिहा किया जाये।
५. रुपम पाठक एवं नवलेश पाठक के परिवार एवं संबंधियों को सुरक्षा प्रदान की जाये।
६. रुपम पाठक केस में चल रही जाँच में गैर कानूनी हस्तक्षेप करते हुये सी. बी. आई.  जाँच को भी रोकने तथा एक पक्षीय बयानबाजी करने वाले बिहार राज्य  के उप मुखयमंत्री सुशील कुमार मोदी अविलम्ब इस्तिफा दें, अन्यथा उनपर भी कड़ी कार्यवाई की जाये।
७. रुपम पाठक का यौन उत्पीड न करने के जुर्म में विपिन राय को अविलम्ब गिरफ्‌तार  कर उस पर मुकदमा चलाया जाये।
८. बिहार राज्य मुखयमंत्री नितीश कुमार अपनी चुप्पी तोड  कर सच्चाई सामने लायें  एवं  उपरोक्त मांगें पुरी करें।
बिहार पी. यू. सी. एल. तथा राष्ट्रीय महिला संगठन इस केस की जाँच करेंगे।

महिला संगठन यह मांग करते है कि इन मांगों पर २४ घंटों के अंदर राज्य के मुखयमंत्री कार्यवाई करें अन्यथा कल दिनांक ०८.०१.२०११ को ३ बजे दिन में डाकबंगला चौराहे पर महिलायें सड क पर उतरेंगी।
यह रिपोर्ट इस केस पर प्राथमिक रिपोर्ट है, दूसरी रिपोर्ट जल्द जारी की जायेगी।
धन्यवाद,

नीलू (बिहार विमेंस नेटवर्क)      कल्पना अशोक (आओ बहीना)   
शिवानी चौधरी (कामकाजी महीला एसोशियेशन) वर्षा (परिवर्तन जन आन्दोलन)
मीना, बिन्दू, प्रिती, साजिना (बिहार विमेन्स नेटवर्क) अरुण कुमार (मानवाधिकार संगठन)

Press Confrence

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प्रेस संवाददाता सम्मेलन
दिनांक ०७.०१.२०११

रुपम पाठक के द्वारा पुर्णिया विधायक राज किशोर केसरी की हत्या के सदर्भ  में मिडिया में आ रहे बयानों के बीच में दिनांक ०६.०१.२०११ को स्वतंत्र महिला संगठन बिहार विमेंस नेटवर्क, आओ बहीना, काम काजी महीला एसोशियेशन, तथा परिवर्तन जन आन्दोलन की नेतृत्वकर्ता नीलू, शिवानी, कल्पना अशोक, वर्षा, मीना, बिन्दू, प्रिती, एवं अरुण कुमार ने कटिहार मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल जाकर रुपम पाठक तथा वहाँ के पुलिस के आला अधिकारियों से मिलने की कोशिश की। हॉस्पिटल पहुँचने पर वहाँ तैनात पुलिस अधिकारी ने रुपम से इस दल को मिलने देने से इनकार कर दिया और कहा कि डी. आई. जी. से बिना अनुमति रुपम से मिलने नहीं दिया जा सकता है। इस दल ने डी. आई. जी. से मोबाईल पर बात की, उन्होंने भी रुपम से मिलने देने से इनकार कर दिया। जब तक हॉस्पिटल के सामने वाले गेट पर डी. आई. जी. से मोबाइल पर बात हो ही रही थी कि डी. आई. जी. के आदेश पर पुलिस ने झटपट रुपम को गाड़ी मे बैठाकर चुपचाप पुर्णिया कोर्ट की तरफ रवाना हुई। पटना से रवाना महिला संगठनों का दल भी उसके पीछे पुर्णिया कोर्ट पहुँचा। जैसे ही इस दल को पुलिस ने देखा वैसे ही रुपम पाठक को गाड ी में बैठाकर बेतहाशा गाड ी दौराते हुये उसे पुर्णिया मंडल कारा ले जाया गया। प्रशासन एवं पुलिस की संदेहास्पद स्थिति पर महिला संगठन के प्रतिनिधियों ने विरोध प्रकट किया। इस दल ने स्थानीय लोगों एवं बुद्धिजीवियों से बातचित की। इस बातचीत के दौरान भयानक सत्य का पर्दाफाश हुआ।

घटना का वृत्तांत यह है कि पुर्णिया विधायक राज किशोर केशरी तथा उनके निजी सहायक विपिन राय के द्वारा पुर्णिया स्थित राज हंस पब्लिक स्कूल की संचालिका रुपम पाठक का लागातार यौन शोषण किया गया। इसके खिलाफ रुपम पाठक ने २००७ में ही प्राथमिकी दर्ज की थी। इस केस को उठाने के लिये उस पर पुर्णिया विधायक की पार्टी के नेताओं द्वारा दबाव बनाया गया जिसके कारण उसने यह केस  उठाया। इस बातचीत में यह भी पता चला कि पुर्णिया विधायक राज किशोर केशरी तथा उनके निजी सहायक विपिन राय तथा इनकी पार्टी के शीर्ष नेताओं द्वारा रुपम पाठक की बेटी नूपुर को उसके पुर्णिया स्थित घर से जबरन उठाकर ले गये तथा उसके साथ बलात्कार किया गया। इस घटना से प्रक्षुब्ध होकर अपने आप को कानून एवं प्रशासन के सामने असहाय महसूस करते हुये मजबूर होकर रुपम पाठक ने कानून से बाहर जाकर इस घटना को अंजाम दिया। यह दल मानता है कि रुपम पाठक ने यह हत्या आत्मरक्षा में निराश, दुखित एवं आक्रोशित होकर की। यह तथ्य भी सामने आया कि इस केस से जुड़े सत्य एवं साक्ष्य को दबाने एवं खत्म करने की कोशिश की जा रही है। यह भी आशंका है कि रुपम पाठक को न्यायिक हिरासत तथा नवलेश पाठक पर  पुलिस हिरासत में मानसिक एवं शारीरिक यातनायें देकर उन्हें इस स्थिति में पहुँचाया जा सकता है कि वे सच्चाई बोलने के लायक ही नहीं बचे।

महिला संगठनों की यह मांग है किः-
१. रुपम पाठक केस में स्वतंत्र संस्थानों जैसे- सी. बी. आई., अथवा सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा जाँच करायी जाये।
२. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा इस केस में सीधा हस्तक्षेप किया जाये। 
३. न्यायिक हिरासत में रुपम पाठक के मानवाधिकार का हनन ना किया जाये।
४. नवलेश पाठक के खिलाफ चल रहे झूठे मुकदमे को वापस लेकर उसे अविलम्ब रिहा किया जाये।
५. रुपम पाठक एवं नवलेश पाठक के परिवार एवं संबंधियों को सुरक्षा प्रदान की जाये।
६. रुपम पाठक केस में चल रही जाँच में गैर कानूनी हस्तक्षेप करते हुये  सी. बी. आई. जाँच को भी रोकने तथा एक पक्षीय बयानबाजी करने वाले बिहार राज्य के उप मुखयमंत्री सुशील कुमार मोदी अविलम्ब इस्तिफा दें अन्यथा उनपर भी कड़ी कार्यवाई की जाये।
७. रुपम पाठक का यौन उत्पीड न करने के जुर्म में विपिन राय को अविलम्ब गिरफ्‌तार कर उस पर मुकदमा चलाया जाये।
८. बिहार राज्य मुखयमंत्री नितीश कुमार अपनी चुप्पी तोड  कर सच्चाई सामने लायें एवं उपरोक्त मांगें पुरी करें।
बिहार पी. यू. सी. एल. तथा राष्ट्रीय महिला संगठन इस केस की जाँच करेंगे।

महिला संगठन यह मांग करते है कि इन मांगों पर २४ घंटों के अंदर राज्य के मुखयमंत्री कार्यवाई करें अन्यथा कल दिनांक ०८.०१.२०११ को ३ बजे दिन में डाकबंगला चौराहे पर महिलायें सड क पर उतरेंगी।
यह रिपोर्ट इस केस पर प्राथमिक रिपोर्ट है, दूसरी रिपोर्ट जल्द जारी की जायेगी।

नीलू (बिहार विमेंस नेटवर्क)          कल्पना अशोक (आओ बहीना)   
शिवानी चौधरी (कामकाजी महीला एसोशियेशन)       वर्षा (परिवर्तन जन आन्दोलन)
मीना, बिन्दू, प्रिती, साजिना (बिहार विमेन्स नेटवर्क)        अरुण कुमार (मानवाधिकार संगठन),

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